Operation Sindoor Inside Story : ऑपरेशन सिंदूर को एक साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन इस सैन्य अभियान से जुड़े कई ऐसे पहलू अब सामने आए हैं, जो उस समय सार्वजनिक नहीं किए गए थे। पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने नई दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) के ‘VIMARSH’ कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की घटनाओं पर कई अहम खुलासे किए। उनके बयान से पता चलता है कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत की पहल के बाद भी भारत ने अपने सैन्य विकल्प बंद नहीं किए थे और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए कई महत्वपूर्ण लक्ष्य तैयार रखे गए थे। आइये बताते हैं कि अनिल चौहान ने क्या कुछ नया खुलासा किया.....
मौसम ने बदला स्कर्दू का प्लान कैसे बचा स्कर्दू
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिए गए फैसलों को याद करते हुए बताया कि जब पाकिस्तान की ओर से बातचीत के लिए फोन आया, उसी समय भारतीय वायुसेना के प्रमुख ने उनसे सरगोधा पर हमला करने की अनुमति मांगी।
उन्होंने कहा, “जब पाकिस्तानियों ने करीब 10 बजे फोन उठाया और कहा कि वे बात करना चाहते हैं, तब एयर चीफ ने मुझसे पूछा कि क्या उन्हें सरगोधा पर हमला करना चाहिए। मैंने कहा- आगे बढ़िए।” यही नहीं, अनिल चौहान ने आगे कहा कि मैंने एयर चीफ मार्शल को पाकिस्तान के अन्य दो और महत्वपूर्ण लक्ष्य चुनने को कहा। इनमें से एक स्कर्दू एयरबेस था।
मौसम ने बदला स्कर्दू का प्लान
अनिल चौहान ने बताया कि स्कर्दू पर कार्रवाई की मंजूरी मिलने के बाद भी हमला नहीं हो सका। वजह थी वहां अचानक खराब हुआ मौसम। चौहान के मुताबिक, “कुछ समय बाद वहां मौसम खराब हो गया और उन्हें लक्ष्य बदलकर भोलारी करना पड़ा।” इसके बाद भारतीय वायुसेना ने भोलारी को निशाना बनाया।
इस खुलासे से साफ होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य योजना परिस्थितियों के अनुसार लगातार बदली जा रही थी। लक्ष्य तय थे, लेकिन मौसम और जमीन पर बदलती परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम निर्णय लिया जा रहा था।
किराना हिल्स पर हमले का सच आया सामने
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के किराना हिल्स जोकि पाकिस्तान का परमाणु ठिकाना है, वहां से जोरदार धमाके और फिर धुआं उठने की तस्वीरों और वीडियो ने काफी चर्चा पैदा की थी। दावा किया जाता रहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के परमाणु हमले की गीदड़भभकियों की हवा निकालते हुए किराना हिल्स को निशाना बनाया है। ऑपरेशन की समाप्ति के बाद भी जब एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह से सवाल पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए इस दावे को ख़ारिज कर दिया था।
हालाँकि अब जनरल चौहान ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि भारत ने सरगोधा के आसपास पाकिस्तानी रडारों की तलाश के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर दूर है।
चौहान ने समझाया कि ऐसे हथियार एक निश्चित समय तक आसमान में घूमकर अपने लक्ष्य की तलाश करते हैं। अगर उस अवधि में लक्ष्य नहीं मिलता, तो उनका ईंधन खत्म होने के बाद वे नीचे गिर जाते हैं।
उनके मुताबिक, “लोइटरिंग मिशन रडार की तलाश कर रहा था... उसकी एक उम्र होती है, यानी वह करीब दो घंटे तक घूम सकता है। अगर उसे लक्ष्य नहीं मिलता तो वह नीचे आ जाता है और कहीं गिर जाता है।”
यानी किराना हिल्स भारत का पहले से तय लक्ष्य नहीं था। वहां हुआ असर एक लोइटरिंग म्यूनिशन के लक्ष्य नहीं मिलने और बाद में गिरने का नतीजा था। चौहान के बयान ने उस समय उठे सवालों को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है।
लोअर एयरस्पेस का इस्तेमाल क्यों किया गया?
ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति पर बात करते हुए पूर्व CDS ने यह भी बताया कि भारतीय सेना ने इस बार पारंपरिक विकल्पों से अलग लोअर एयरस्पेस का इस्तेमाल करने का फैसला किया था। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने तीसरा विकल्प इस्तेमाल करने का फैसला किया, यानी लोअर एयरस्पेस का फायदा उठाना।”
उनके मुताबिक इसका मकसद संघर्ष की सीमा को नियंत्रित रखना, सफलता की संभावना बढ़ाना और दुश्मन को चौंकाने का तत्व बनाए रखना था। इस रणनीति में ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और दूसरे लो-लेवल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकता था।
‘आखिरी वार पाकिस्तान नहीं करेगा’
ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति के बारे में चौहान ने एक और अहम बात कही। उन्होंने बताया कि भारतीय सैन्य नेतृत्व ने पहले से अलग-अलग स्तर की कार्रवाई और पाकिस्तान की संभावित प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार की थी।
उन्होंने कहा, “हमारी एस्केलेशन मैट्रिक्स के कुछ सिद्धांतों में से एक यह था कि आखिरी हमला या जीत का अंतिम संकेत हमेशा हमारी तरफ से दिया जाएगा, पाकिस्तान की तरफ से नहीं।” यह बयान बताता है कि भारत की रणनीति केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि संघर्ष के संभावित अगले चरणों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी।
सीजफायर की जानकारी अमेरिका तक कैसे पहुंची?
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए सीजफायर को लेकर भी एक अहम सवाल उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य स्तर पर सीजफायर का फैसला भारत और पाकिस्तान के DGMO के बीच सीधे संपर्क में हुआ था। उन्होंने बताया कि बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने समय के मुताबिक आगे की बातचीत तय की और शाम 5 बजे सीजफायर पर सहमति बनी।
चौहान ने कहा, “सीजफायर दोनों देशों के DGMO के बीच हुई बातचीत के बाद तय हुआ था। इसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि भारत की ओर से आधिकारिक घोषणा किए जाने से पहले ही अमेरिका को इसकी जानकारी कैसे मिल गई।
उन्होंने कहा, “यह खास जानकारी अमेरिकियों तक कैसे पहुंची कि उन्होंने हमारे घोषणा करने से पहले ही ट्वीट कर दिया? सच कहूं तो मुझे पक्का नहीं पता, लेकिन यह हमारी तरफ से लीक नहीं हुई थी।” चौहान ने आगे कहा कि मुझे पूरा उम्मीद है कि सीजफायर पर सहमती बनने के बाद पाकिस्तान की ओर से यह जानकारी लीक की गई, जिससे कि अमेरिका ने इस बारे में ट्वीट किया।
ऑपरेशन सिंदूर की तस्वीर अब और साफ
पूर्व CDS अनिल चौहान के इन खुलासों से ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति की एक विस्तृत तस्वीर सामने आती है। भारत ने एक तरफ आतंक के ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की, वहीं दूसरी तरफ संभावित सैन्य प्रतिक्रिया के लिए कई विकल्प तैयार रखे।
सरगोधा पर हमले की मंजूरी, स्कर्दू को संभावित लक्ष्य बनाना, खराब मौसम के कारण भोलारी की ओर रुख करना, रडार तलाशने के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल और किराना हिल्स की घटना-इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर में सैन्य फैसले बेहद नियंत्रित और परिस्थितियों के मुताबिक लिए गए थे। और सबसे अहम बात यह कि इन खुलासों के जरिए पहली बार उस ऑपरेशन के कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जिनकी जानकारी उस समय सार्वजनिक नहीं की गई थी।