पाकिस्तान में मिटाई जा रही अल्पसंख्यकों की विरासत, मंदिरों के बाद अब ऐतिहासिक 200 साल पुराने गुरुद्वारे पर चला बुलडोजर

    31-अगस्त-2026
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Pakistan Gurdwara Demolished Quetta
 क्वेटा में ऐतिहासिक 200 साल पुराना श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा 
 
 Written By : Ujjawal Mishra
 
Delhi :  पाकिस्तान के क्वेटा में करीब 200 साल पुराने श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे की इमारत को ध्वस्त कर दिया गया है। धार्मिक स्थलों पर हुए इस हमले की खबर ने एक बार फिर वहां अल्पसंख्यकों की धार्मिक विरासत की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिख समुदाय का आरोप है कि कट्टरपंथियों द्वारा गुरुद्वारे की जमीन पर कब्जा कर वहाँ शॉपिंग प्लाजा बनाया जा रहा है।
  
श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे का इतिहास
 
दो सदी पुराने श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे निर्माण उस समय हुआ था, जब पाकिस्तान अस्तित्व में भी नहीं आया था। 1947 में भारत के विभाजन से पहले क्वेटा और आसपास के क्षेत्रों में सिख समुदाय की बड़ी आबादी रहती थी। यहां बसे सिख परिवारों ने अपनी धार्मिक आस्था और गुरु ग्रंथ साहिब की सेवा के लिए इस गुरुद्वारे की स्थापना की थी।
 
बंटवारे से पहले क्वेटा में सिख समुदाय की मौजूदगी काफी मजबूत थी, लेकिन 1947 के बाद बड़ी संख्या में सिख परिवार भारत चले गए। इसके बाद पाकिस्तान में पीछे छूट गई हिंदू और सिख समुदायों की कई धार्मिक व ऐतिहासिक संपत्तियां। 1947 के बाद बंटवारे के बाद इस गुरुद्वारे के परिसर में लगभग 1953 से सेंट गैब्रिएल स्कूल संचालित होने लगा था।
 
 
 
बता दें कि पाकिस्तान में धार्मिक और ऐतिहासिक संपत्तियों की देखरेख के लिए पाकिस्तान में 'Evacuee Trust Property Board' यानी ETPB की व्यवस्था की गई। यही संस्था पाकिस्तान में हिंदू और सिख समुदाय से जुड़ी कई धार्मिक संपत्तियों की देखरेख करती है।
 
स्थानीय सिख प्रतिनिधि सरदार जसबीर सिंह ने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक गुरुद्वारे की जमीन को पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की ओर से एक निजी बिल्डर को बेच दिया गया। उनके मुताबिक, इसी जमीन पर अब अवैध रूप से कब्जे के बाद व्यावसायिक निर्माण की तैयारी की जा रही है।
 
 
पाकिस्तान में लगातार निशाना बनते मंदिर-गुरुद्वारे
 
जानकारी के लिए बता दें कि बलूचिस्तान में किसी समय 12 ऐतिहासिक गुरुद्वारे हुआ करते थे, लेकिन कट्टरपंथियों द्वारा इन गुरुद्वारों पर या तो अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया या इन्हें तोड़ दिया गया। अब वहां केवल 2 गुरुद्वारे ही सक्रिय बचे हैं और पुरे पाकिस्तान में 7 गुरुद्वारे शेष बचे हैं।
 
वहीं दिसंबर 2025 में पाकिस्तान की माइनॉरिटी कॉकस की संसदीय समिति को पेश की गई एक रिपोर्ट में खुलासा था कि मुल्क में 1947 के दौरान कुल 1,817 हिंदू मंदिर और गुरुद्वारे मौजूद थे। जहां पूजा पाठ से लेकर धार्मिक गतिविधियाँ होती थीं। हालाँकि मौजूदा समय में 28 धार्मिक स्थल शेष बचे हैं। अन्य सभी मंदिर और गुरुद्वारा कट्टरपंथियों की हिंसा के भेंट चढ़ गए।
 
इन धार्मिक स्थलों को या तो उपेक्षा के कारण खंडहर होने दिया गया या अवैध कब्जों और दंगों के दौरान तोड़ दिया गया। इनमें 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद पाकिस्तान में हुए दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त किए गए धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। इनमें से सैंकड़ों ऐतिहासिक मंदिरों और गुरुद्वारों को सरकारी स्कूलों, मदरसों, होटलों, दुकानों और रेस्तरां में तब्दील कर दिया गया है। वहीं, एक आर्थिक जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 6 लाख से अधिक मस्जिदें सक्रिय हैं।
 
धार्मिक स्थल और अल्पसंख्यकों की स्थति 
 
धार्मिक स्थलों के साथ-साथ दोनों देशों में अल्पसंख्यक आबादी की स्थिति भी एक अहम तस्वीर सामने रखती है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाता है, लेकिन उसके अपने आंकड़े भी कई सवाल खड़े करते हैं। भारत में मुस्लिम आबादी 1951 में करीब 3.5 करोड़ थी, जो 2011 की जनगणना में बढ़कर 17.2 करोड़ यानी 14.2% हो गई और 2026 के अनुमान के मुताबिक यह करीब 25 करोड़ मानी जाती है।
 
वहीं पाकिस्तान के लिए 1947 में तत्कालीन पाकिस्तान की आबादी में गैर-मुस्लिमों की हिस्सेदारी 23% से अधिक बताई जाती है, जबकि 2023 की जनगणना में हिंदू आबादी 2.17% यानी करीब 52.2 लाख, ईसाई आबादी 1.37% यानी करीब 33 लाख और सिख आबादी करीब 16 हजार दर्ज की गई।
 
धार्मिक स्थलों की बात करें तो उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 3 से 4 लाख मस्जिदें हैं, जो इंडोनेशिया के बाद दुनिया में सबसे अधिक बताई जाती हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान में 2023-25 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1,285 हिंदू पूजा स्थल और 532 गुरुद्वारे दर्ज हैं।
  
 
 
 
मंदिरों के साथ भी हुई ऐसी घटनाएं
 
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में किसी अल्पसंख्यक धार्मिक स्थल के अस्तित्व पर सवाल उठा हो।
 
1. 2024 में खैबर के लांडी कोटल में एक पुराने हिंदू मंदिर की संरचना गिराकर उसके स्थान पर व्यावसायिक इमारत का निर्माण शुरू हुआ।
 
2. 2020 में करक के तेरी गांव में कट्टरपंथी भीड़ ने हिंदू मंदिर पर हमला कर आगजनी की।
 
3. 2021 में भोंग के श्री गणेश मंदिर पर कट्टरपंथी भीड़ ने हमला कर तोड़फोड़ की।
 
4. फारूकाबाद, 2026: करीब 125 साल पुराने गुरुद्वारा सिंह सभा को तोड़ दिया गया।
 
और मामला सिर्फ हिंदू और सिख धार्मिक स्थलों तक नहीं रुका। 2023 के जरनवाला हिंसा में कम से कम 24 चर्च और कई छोटे चैपल जला दिए गए। यह तथ्य पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की जांच में दर्ज है। इसके अलावा भी कई ऐसे मामले आय दिन सामने आते रहते हैं।
 
अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कब तक ?
 
भारत के लिए पाकिस्तान में मौजूद ये मंदिर और गुरुद्वारे केवल दूसरे देश की इमारतें नहीं हैं। ये उस साझा इतिहास की निशानियां हैं, जो 1947 के बंटवारे से पहले का है। क्वेटा का 200 साल पुराना गुरुद्वारा हो या लांडी कोटल का मंदिर जब धार्मिक विरासत की जगह प्लाजा खड़ा होता है, तो सिर्फ पत्थर नहीं हटते, इतिहास का एक हिस्सा भी मिटता है।
 
पाकिस्तान अक्सर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक सहिष्णुता के दावे करता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं, मंदिर और गुरुद्वारे अपनी जगह सुरक्षित नहीं हैं, तो इन दावों की जमीन पर कितनी कीमत है?