
Written By : Ujjawal Mishra
Delhi : सिंधु जल संधि यानी IWT पर नीदरलैंड के हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने फैसला सुनाया है। तथाकथित हेग कोर्ट ने पाकिस्तान की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि अभी लागू है और भारत इसे एकतरफा तौर पर स्थगित नहीं कर सकता। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में बन रहे रतले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ निर्माण कार्यों पर भी अंतरिम रोक लगाने का निर्देश दिया।
हेग कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट का कहना है कि IWT के तहत कोई एक पक्ष अपने स्तर पर संधि को स्थगित या समाप्त नहीं कर सकता। रतले परियोजना के बांध और पानी के इनटेक से जुड़े कुछ निर्माण कार्यों को सीमित करने का अंतरिम आदेश भी दिया गया है। हालांकि, भारत ने इस पूरी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया और कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को ही स्वीकार नहीं किया।
भारत का दो-टूक जवाब - फैसला मंजूर नहीं
हेग के फैसले के तुरंत बाद भारत ने साफ कर दिया कि वह इसे मान्यता नहीं देता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के अस्तित्व को कभी स्वीकार नहीं किया है और इसे गैर-कानूनी तरीके से गठित संस्था मानता है।
नई दिल्ली ने दोहराया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला कायम है और इस संस्था का फैसला भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। भारत का तर्क है कि जिस संस्था के अधिकार क्षेत्र को ही वह स्वीकार नहीं करता, उसके फैसले को मानने का सवाल ही नहीं उठता।
पाकिस्तान की पहल पर 2023 में शुरू हुई इस आर्बिट्रेशन प्रक्रिया को भारत ने IWT के तय विवाद-समाधान तंत्र के विपरीत बताया था। यही वजह है कि भारत ने न तो इसकी कार्यवाही में हिस्सा लिया और न ही इसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार किया।
एक्सपर्ट की क्या है राय ?
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने भी भारत के रुख को महत्वपूर्ण बताया है। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता संस्थाओं के पास अपने फैसलों को जमीन पर लागू कराने का कोई अधिकार नहीं होता। जब कोई देश किसी ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र को ही स्वीकार नहीं करता, तो उसके फैसले को लागू कराना व्यावहारिक रूप से अलग चुनौती बन जाता है। लिहाजा कोर्ट का कोई भी फैसला भारत पर दबाव नहीं बना सकता।
क्या है IWT ?
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में अस्तित्व में आई थी। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए। 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने IWT को स्थगित रखने का फैसला किया। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि खून और पानी दोनों एक साथ नहीं बह सकते। जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर देता तब तक सिन्धु जल संधि स्थगित रहेगी।
मासूम लोगों का खून बहाने वाला पाकिस्तान बूँद बूँद पानी को तरस रहा है। कागज़ के टुकड़े लिए वैश्विक मंचों का चक्कर काट रहा है, लेकिन भारत का संदेश साफ़ है भारत अपने राष्ट्रीय हित और संप्रभु फैसले किसी बाहरी दबाव में तय नहीं करेग। खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा।