'आतंकियों को कंट्रोल नहीं करते तो, न्यूयॉर्क-लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते', UN में शहबाज का ऐतिहासिक कबूलनामा
23-सितंबर-2026
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'अगर पाकिस्तान ने आतंकवादियों को नियंत्रित नहीं किया होता, तो वे आज न्यूयॉर्क या लंदन की सड़कों पर खुलेआम घूम रहे होते'
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से शहबाज शरीफ ने अनजाने ही सही, मगर पाकिस्तान की सबसे कड़वी और शर्मनाक सच्चाई दुनिया के सामने रख दी.
वे पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ दुनिया का रक्षा कवच साबित करने निकले थे, लेकिन सेल्फ गोल कर बैठे.
अब क्या ये अनजाने में हुई जुबानी फिसलन थी या फिर एक सोची समझी साजिश?... पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के इस बयान के कई मायने हो सकते हैं.
पहला, शहबाज ने खुद मान लिया कि आतंकवाद का रिमोट कंट्रोल पाकिस्तान के हाथ में है. वो जब चाहें इन्हें रोक सकते हैं और जब चाहें छोड़ सकते हैं.
दूसरा, कंगाल हो चुका पाकिस्तान दुनिया को यह डर दिखा रहा है कि अगर उसे आर्थिक मदद नहीं मिली, तो ये आतंकी पश्चिमी देशों की सड़कों तक पहुंच जाएंगे.
वैसे, यह पहली बार नहीं है जब किसी पाकिस्तानी नेता ने सच उगला हो.
हाल ही में लाहौर में एक कार्यक्रम के दौरान पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने कहा था कि पंजाब को भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा से उतना खतरा नहीं है, जितना खतरा उसे अपने ही पड़ोसी पाकिस्तानी प्रांतों से आने वाले आतंकियों है.
साल 2019 में तत्कालीन पीएम इमरान खान ने अमेरिका में खुलेआम माना था कि उनके देश में 30 से 40 हजार सक्रिय आतंकवादी मौजूद हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान और कश्मीर में जंग लड़ी.
उससे पहले, पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कैमरे पर स्वीकार किया था कि ओसामा बिन लादेन और हाफिज सईद जैसे खूंखार आतंकी पाकिस्तान के 'हीरो' हुआ करते थे और पाकिस्तान ने खुद उन्हें ट्रेनिंग दी थी.
भारत दशकों से एक ही बात दोहराता आया है, पाकिस्तान ही आतंकवाद का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर देश है. शहबाज शरीफ का ये बयान भारत के उसी स्टैंड को और पुख्ता करता है. जम्मू कश्मीर नाऊ दिल्ली