नई दिल्ली : कट्टरपंथियों के मुल्क पाकिस्तान अल्पसंख्यक होना ही पाप है। पाकिस्तान से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल इंसानियत को झकझोर दिया है, बल्कि वहां की न्याय व्यवस्था को एक बार भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक मुस्लिम शख्स ने अपने साथियों के साथ एक ईसाई परिवार के घर में घुसकर युवती के साथ रेप किया और फिर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
आरोपी की पहचान अदनान भट के रूप में हुई। जानकारी के अनुसार अदनान अपने साथियों के साथ युवती के घर में दाखिल हुआ था। उसके हाथ में हथियार मौजूद था, जिसके दम पर पहले युवती के साथ रेप किया गया और फिर माथे पर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद आरोपियों ने बंदूक की नोक पर युवती के भाई को भी अगवा कर लिया और परिवार वालों को धमकी दी कि अगर उन्होंने इस मामले में शिकायत की तो उसके बेटे को भी मार दिया जाएगा।
बहरहाल, हमेशा की तरह अल्पसंख्यकों के साथ हुए इस तरह के अमानवीय अत्याचार की खबरों को ना तो पाकिस्तानी मीडिया में कोई जगह मिलती और ना ही पीड़ित परिवारों को न्याय। परिवार अभी भी न्याय की आस में बैठा है।
जैसा कि पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कोई नया मामला नहीं है। यहां आए दिन हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय की महिलाओं और लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरन निकाह के मामले सामने आते रहते हैं।
और अब इस दावे को सिर्फ भारत या किसी मानवाधिकार संगठन की बात समझकर खारिज नहीं किया जा सकता। 22 अप्रैल 2026 को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने खुद पाकिस्तान में अल्पसंख्यक महिलाओं और लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण के मामलों पर गंभीर चिंता जताई।
UN विशेषज्ञों के मुताबिक, 2025 में जबरन धर्मांतरण के बाद शादी के मामलों में प्रभावित महिलाओं और लड़कियों में करीब 75 प्रतिशत हिंदू और 25 प्रतिशत ईसाई थीं। करीब 80 प्रतिशत मामले सिंध प्रांत से जुड़े थे। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि 14 से 18 वर्ष की किशोरियां विशेष रूप से निशाने पर हैं और कुछ पीड़िताएं इससे भी कम उम्र की हैं।
13 साल की मारिया का मामला
अभी हाल में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शाहबाज के मामले ने पाकिस्तान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। रिपोर्टों के अनुसार, मारिया को उसके परिवार से अगवा किया गया, जबरन इस्लाम कबूल कराया गया और फिर 30 वर्षीय शख्स शह्रियार अहमद से उसका निकाह करा दिया गया। बाद में अदालत के एक फैसले में उसकी कस्टडी उसी व्यक्ति को सौंपे जाने पर व्यापक चिंता जताई गई, जिस पर उसे अगवा करने के आरोप लगे थे।
नेहा फकीर का मामला पहुंचा अमेरिका तक
इसके अलावा पिछले महीने 18 वर्षीय ईसाई युवती नेहा फकीर के कथित अपहरण और जबरन धर्मांतरण का मामला भी सामने आया। नेहा 24 मार्च को एक सिलाई केंद्र जाने के बाद लापता हुई थी और बाद में लाहौर में मिली। उसके परिवार ने उसकी वापसी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
मामला इतना गंभीर हुआ कि अब पाकिस्तान की सीमाओं से बाहर भी इसकी आवाज पहुंच गई है। अमेरिकी कांग्रेस के 11 सांसदों ने 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार को पत्र लिखकर नेहा की सुरक्षा और उसके मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
काजोल मेघवार का मामला
दिसंबर 2024 में सिंध के मीरपुरखास जिले की 15 वर्षीय हिंदू लड़की काजोल मेघवार को उसके घर से बंदूक की नोक पर अगवा किया गया। USCIRF के अनुसार उसे इस्लाम में परिवर्तित किया गया, नया नाम दिया गया और अधेड़ उम्र के अपहरणकर्ता से निकाह् कराया गया। परिवार ने न्याय की भीख मांगी लेकिन प्रशासन से निराशा हाथ लगी।
राधा भील और सनेहा मेघवार
अप्रैल 2025 में 14 वर्षीय राधा भील को कथित तौर पर बंदूक की नोक पर घर से अगवा किया गया, धर्म परिवर्तन कराया गया और उसके अपहरणकर्ताओं में से एक से विवाह कराया गया। मई 2025 में 15 वर्षीय सनेहा मेघवार के मामले में भी USCIRF ने घर में घुसकर हथियारबंद लोगों द्वारा अपहरण, कथित धर्मांतरण और विवाह का विवरण दर्ज किया। यहाँ भी पीड़ित युवती और उसके परिवार को न्याय के नाम पर निराशा ही हाथ लगी।
निष्कर्ष
आखिर सवाल यह है कि पाकिस्तान कब तक कट्टरपंथ की आड़ में अल्पसंख्यकों की आवाज दबाता रहेगा? जिस देश में हिंदू, सिख और ईसाई परिवार अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए दर-दर भटकें और न्याय के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने को मजबूर हों, वहां धार्मिक आजादी और मानवाधिकार के दावे सिर्फ दिखावा नजर आते हैं। पाकिस्तान की समस्या सिर्फ आतंक की नहीं, उस कट्टरपंथी सोच की है जिसने इंसान की पहचान से पहले उसका मजहब देखना सिखा दिया है।