एक जोरदार धमाके के बाद जलते पाकिस्तानी सेना के वाहन और कतार से ताबूतों में रखे सैनिकों के शव. बलूचिस्तान से सामने आये ये विजुअल्स ये बताने के लिए काफी हैं कि इस क्षेत्र में अब पाकिस्तानी सेना अपना होल्ड खो चुकी है.
ताजा मामला है, बलूचिस्तान के ज़ियारत क्रॉस का, यहां बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के फतह स्क्वाड ने पाकिस्तानी सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला किया.
इस हमले में पाकिस्तानी सेना के 18 जवानों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, सेना के दो वाहन जलकर खाक हो गए.
BLA ने दूसरा हमला किया सुराब जिले के हाजिका इलाके में. यहां BLA के 'स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वाड' ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सेना की एक गाड़ी को निशाना बनाया. इस हमले में 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, सेना के वाहन के भी परखच्चे उड़ गए. इस तरह इन दोनों हमलों में करीब 25 पाकिस्तानी जवान मारे गए.
पाकिस्तानी सेना पर उसके अपने ही देश में होते हमले सामान्य तो बिलकुल नहीं कहे जा सकते. ये हमले तथाकथित मुस्लिम नाटो को लीड करने का दम भरने वाले पाकिस्तान की हकीकत बताते हैं. उसकी सेना और सरकार पर कई सवाल खड़े करते हैं.
- पाकिस्तान सरकार जब अपने देश में अपनी सेना को नहीं बचा पा रही, तब शहबाज और मुनीर किस मुंह से दुनिया भर में डिफेंस डील करते फिर रहे हैं. बलूचिस्तान में अपने जवानों को नहीं बचा पाने वाले, जरूरत पड़ने पर सऊदी और तुर्किये की कैसे रक्षा करेगा?
- सेना किसी भी देश का गर्व होती है, लेकिन पाकिस्तान में लोग सेना को उसके मुंह पर गाली देते हैं. उस पर हमले करते हैं. लोगों के बीच एक नारा काफी फेमस भी है- ये जो दहशतगर्दी है, उसके पीछे वर्दी है.
-पाकिस्तान के पास इतने भी संसाधन नहीं कि अपने जवानों को बुलेट प्रूफ वाहन ही दिलवा सके. जबकि दूसरी तरफ आसिम मुनीर अपने लिए प्राइवेट जेट खरीद लेता है.
- इतने भीषण हमले इससे पहले कभी पाकिस्तानी आर्मी पर नहीं हुए. रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये अकेले BLA का काम नहीं है. TTP भी उसके साथ है. और इसका मतलब है कि आधा पाकिस्तान सरकार के हाथ से निकल चुका है.
अब पाकिस्तानी आर्मी वही करेगी, जो इस तरह के हमलों के बाद वो हमेशा से करती आई है. कहीं से भी मासूम बेगुनाह लोगों को उठाएगी या फिर जिनको पहले से ही उठाया जा चुका है, उनको हमलावर बताते हुए मौत के घाट उतार दिया जाएगा. दरअसल लोगों में जो सेना को लेकर जो नफरत का भाव है, उसका मूल कारण भी यही है. युद्ध के मैदान में सरेंडर करने वाली पाकिस्तानी आर्मी का अपने ही लोगों के खिलाफ ऑपरेशन में कोई जवाब नहीं.
इस तरह के घटनाक्रम जब सामने आते हैं, पाकिस्तान एक और काम बखूबी करता है. और वो है, सारा दोष भारत के सिर मढ़ देना. इसके लिए उसने एक शब्द कॉइन किया है- फ़ितना-अल-हिंदुस्तान. पाकिस्तानी सेना और गृह मंत्रालय बलूच विद्रोहियों को इसी नाम से बुलाते हैं. उन पर आरोप लगाते हैं कि वो भारत के इशारे पर पाकिस्तानी आर्मी पर हमला करते हैं.
लेकिन आरोपों से हटकर पाकिस्तान एक भी सबूत आज तक भारत के खिलाफ पेश नहीं कर पाया है. अब पाकिस्तान जो मर्जी बयान देता रहे, सच्चाई यही है कि जब सेना का सुप्रीमो सत्ता पर कब्जा करने के लिए देश के बहुमूल्य खनीजों को वैश्विक महाशक्तियों के हाथों में गिरवी रख देता है. जब लोग दाने-दाने को मोहताज हो जाते हैं. तो मरता क्या ना करता ! वो सिस्टम से इसका बदला लेते हैं. तब देश की ही सीमा के ही भीतर सेना पर हमलों को कोई नहीं रोक सकता. बलूच विद्रोही यही कर रहे हैं. जम्मू कश्मीर नाऊ