खुल गया 60 घंटों की सीक्रेट एयरलिफ्टिंग का भेद... तुर्किये के विमान पाकिस्तान लाए थे ये विशेष ड्रोन !
08-सितंबर-2026
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Delhi : पाकिस्तान के नूर खान और मसरूर जैसे अहम एयरबेसों पर करीब ढाई दिनों यानी 60 घंटे तक चीन और तुर्की के सैन्य परिवहन विमानों की लगातार आवाजाही ने दुनिया भर का ध्यान खींचा था। सवाल सीधा था कि आखिर इन विमानों के जरिए पाकिस्तान तक ऐसा क्या पहुंचाया जा रहा है, जिसके लिए सैन्य परिवहन विमानों को इतनी बार उड़ान भरनी पड़ रही है?
उस वक्त सिर्फ कयास थे, लेकिन अब इस पूरी कहानी की एक अहम कड़ी सामने आती दिख रही है। पाकिस्तान की सेना के एक वीडियो में तुर्की का Baykar K2 कामिकाजे ड्रोन नजर आया है। ऐसे में उस लंबी एयरलिफ्ट को लेकर उठ रहे सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। क्या उन विमानों के जरिए पाकिस्तान तक तुर्की के नए ड्रोन और दूसरे सैन्य सिस्टम पहुंचाए गए थे?
Baykar का K2 ड्रोन की खासियत
Baykar का K2 कोई सामान्य निगरानी ड्रोन नहीं है। यह एक कामिकाजे UAV है, यानी ऐसा ड्रोन जिसे लक्ष्य तक पहुंचकर खुद ही हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
Baykar के मुताबिक K2 की रेंज 2,000 किलोमीटर से ज्यादा है और यह 200 किलोग्राम से अधिक का वारहेड ले जा सकता है। इसकी उड़ान क्षमता 13 घंटे से ज्यादा बताई गई है। यानी यह ड्रोन काफी दूर तक जाकर लंबे समय तक लक्ष्य की तलाश कर सकता है और जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकता है।
K2 को सिर्फ लंबी दूरी के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के माहौल में काम करने और GNSS के बिना नेविगेशन करने जैसी क्षमताएं भी बताई गई हैं।
K2 को लेकर सबसे दिलचस्प संकेत पाकिस्तान की सेना के एक वीडियो से सामने आया। वीडियो में तुर्की के AKINCI और TB2 जैसे ड्रोन सिस्टम के साथ K2 भी दिखाई दिया।
यही तस्वीर इस पूरे मामले को खास बनाती है। अगर K2 वास्तव में पाकिस्तान के सैन्य ढांचे का हिस्सा बन चुका है, तो यह उसकी ड्रोन क्षमता में एक बड़ा बदलाव हो सकता है।
हालांकि, तुर्की की ओर से पाकिस्तान को K2 की औपचारिक बिक्री या डिलीवरी की अलग से सार्वजनिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। लेकिन पाकिस्तानी सैन्य वीडियो में इसका दिखाई देना निश्चित तौर पर सवाल खड़े करता है।
भारत के लिए कोई खतरा ?
भारत के लिए चिंता सिर्फ इस बात की नहीं है कि पाकिस्तान के पास एक नया ड्रोन आ सकता है। असली सवाल इसकी क्षमता और इस्तेमाल के तरीके का है। 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज वाला कामिकाजे ड्रोन पाकिस्तान को भविष्य में अपनी सीमा से काफी दूर तक लक्ष्य साधने की क्षमता दे सकता है।
युद्ध के मैदान में इसका मतलब साफ है-अगर भविष्य में ऐसे ड्रोन बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जाते हैं, तो एक साथ कई दिशाओं से आने वाले लक्ष्यों को रोकना एयर डिफेंस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
भारत-पाकिस्तान के बीच भविष्य का युद्ध सिर्फ मिसाइलों और लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रहने वाला। हाल के वर्षों में ड्रोन युद्ध ने तस्वीर बदल दी है। तुर्की के साथ पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य नजदीकी और अब K2 जैसे अत्याधुनिक कामिकाजे ड्रोन की मौजूदगी इस बदलते युद्ध की एक और झलक देती है।