इतिहास

#KashmiriHinduExodus 13 फरवरी 1990, जब दूरदर्शन डायरेक्टर लस्सा कॉल की हत्या

 1990 में कश्मीर के हालात बदतर हो चुके थे, इन हालात में भी दूरदर्शन कश्मीर और राष्ट्रवाद की तस्वीर लोगों तक पहुंचा रहा था। जेकेएलएफ जैसे आतंकी संगठन दूरदर्शन को सांस्कृतिक हमला बताकर निशाना बना रहे थे। लस्सा कौल दूरदर्शन केंद्र के डायरेक्टर थे आतंकियों ने दूरदर्शन के कर्मचारियों को मारने की धमकी दी। गवर्नर ने भी लस्सा कौल को सिक्योरिटी साथ रखने को कहा। लेकिन लस्सा कौल को कश्मीर की हवा में जहर को पहचान नहीं पाये। वो बेहद शांत और नरम स्वभाव के थे, उनके इस व्यवहार ने हिन्दुओं के साथ कई ..

#KashmiriHinduExodus 12 फरवरी, 1990- जब एक हिंदू सीबीआई ऑफिसर टीके राजदान के बरसों पुराने मुस्लिम दोस्त ने उसकी हत्या कर दी

 1990, कश्मीर में मुस्लिम आवाम के दिलों में आतंकवाद का जहर घोल दिया गया था। वो सदियों से साथ रहते आये हिंदूओं को अचानक दुश्मन समझने लगे थे। बड़गाम निवासी तेज कृष्ण राजदान भी इसी जहर के शिकार बने। तेज़ कृष्ण राज़दान, जो की बढियार भल्ला, श्रीनगर के रहने वाले थे। तेज़ कृष्ण राज़दान केंद्रीय जांच ब्यूरो(CBI ) में बतौर इंस्पेक्टर नियुक्त थे,जो कि पंजाब में तैनात थे। फरवरी,1990 में तेज़ कृष्ण राज़दान छुट्टियों में अपने गांव आये हुए थे। राजदान छुट्टियों के बाद अपने पूरे परिवार को अपने साथ पंजाब में रहने ..

फरवरी, 1931 कनीकूट नरसंहार- घाटी से कश्मीरी हिंदूओं के पहले नरसंहार और बाहर निकालने की साजिश की पूरी कहानी

 कश्मीर घाटी में कश्मीरी हिंदूओं पर हमले 1989-90 में नहीं उससे कहीं पहले शुरू हो गये थे, आजादी से भी पहले। हिंदूओं को खदेड़ने की साजिश के तहत पहला नरसंहार हुआ था फरवरी 1931 में, बड़गाम के कनीकूट गांव में। जहां एक ही परिवार के 8 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी। दरअसल कनीकूट चडूरा तहसील के नगाम के पास एक गांव था, नगाम में काफी संख्या में कश्मीरी हिंदू थे। लेकिन कनीकूट में सिर्फ दो हिंदू परिवार थे। पं ज़ना भट और जानकी नाथ परिवार। उनमें से एक ज़ना भट्ट परिवार में कुल 12 लोग थे जिनमें से ..

7 Feb,1948: मेजर सरदार मलकीत सिंह बरार की वीरता की कहानी, जो अपने साथियों की जान बचाते-बचाते खुद शहीद हो गये

1947-48, भारत-पाकिस्तान युद्ध- एक ऐसा वीर सैनिक जिसके 2 फुट दूर 3 इंच का मोर्टार बम विस्फोट हुआ और आखिरी सांस से पहले कहता है की "अच्छी तरह से बी कंपनी। नीचे उतरो, मैं बिलकुल ठीक हूँ" मेजर सरदार मलकीत सिंह बरार पंजाब के फरीदकोट जिले के आलमवाला से थे। मलकीत सिंह का जन्म 15 अगस्त 1918 को हुआ था। 1 जनवरी 1941 को सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन ज्वाइन किया। 7 साल सेवा करने के बाद 1948 में वो एक मेजर के पद पर पदोन्नत हुए। बात फरवरी 1948 के दौरान की है, जब मेजर मलकीत सिंह की ..

लेफ्टिनेंट किशन सिंह राठौड़ जिन्होंने 1948 में अपनी जान पर खेलकर 1500 पाकिस्तानी घुसपैठियों को रोका

 6 फरवरी 1948 को, लेफ्टिनेंट किशन सिंह राठौड़ और तेन धार में तैनात राजपूत रेजिमेंट के 70 जवानों पर 1500 पाकिस्तानी घुसपैठियों ने हमला किया था। लेफ्टिनेंट ने अपने सैनिकों को पिकेट में उनके बीच जाकर उनका साहस बढ़ाया। हमले के दौरान वो खुद अपने जवानों को गोलाबारूद मोहोईया करा रहे थे। उनके जोशीले नेतृत्व ने भारतीय सैनिकों के मन में जोश की भावना को जगाये रखा।मार्च में, लेफ्टिनेंट राठौड़ को कोमन गोशा धार में एक खुफिया अधिकारी के रूप में तैनात किया गया था। जब दुश्मन लगातार सामने से हमले कर रहा ..

नेहरू और इंदिरा ये गलतियां न करतें...तो जम्मू कश्मीर आज खुशहाल राज्य होता। जानिये क्या थीं वो गलतियां…

नेहरू और इंदिरा ये गलतियां न करतें...तो जम्मू कश्मीर आज खुशहाल राज्य होता। जानिये क्या थीं वो गलतियां…..

मै एक इंच पीछे नहीं हटूंगा और तब तक लड़ता रहूँगा, जब तक कि मेरे पास आखिरी जवान और आखिरी गोली है- मेजर सोमनाथ शर्मा।

मै एक इंच पीछे नहीं हटूंगा और तब तक लड़ता रहूँगा, जब तक कि मेरे पास आखिरी जवान और आखिरी गोली है- मेजर सोमनाथ शर्मा।..

लोंगेवाला का युद्ध- जब 120 भारतीय सैनिकों ने टैंकों से लैस 2000 पाकिस्तानी सैनिकों को धूल चटा दी थी

    लेखक- अजीत सिंह 4 दिसंबर 1971, भारत-पाकिस्तान सीमा, भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट की 'A' कंपनी के सिर्फ 120 जवान लौंगेवाला में तैनात थे उस रात , जब पाकिस्तान ने हमला किया । रात करीब 9 बजे मेजर चांदपुरी को अपने गश्ती दल से सूचना मिली कि पाकिस्तान की एक बड़ी सेना लोंगेवाला चौकी की तरफ बढ़ रही है . मेजर चांदपुरी ने अपने कमांडिंग ऑफीसर को संदेश भेज मदद मांगी । CO ने स्पष्ट कह दिया .सुबह पौ फटने से पहले कोई मदद भेजना संभव नही । क्योंकि उस ज़माने की हमारी एयर फाॅर्स के लड़ाकू जहाजों ..

कश्मीर से निष्कासन हिंदुओं का न भूले जाने वाला दर्द

जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र भोपाल के द्वारा शिवाजीनगर स्थित विश्व संवाद केंद्र में , 1990 में कश्मीरी हिन्दूओं के निर्वासन की स्मृति में "निष्कासन दिवस का आयोजन किया गया ।  कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रख्यात पत्रकार और इतिहासकार विजय मोहन तिवारी थे ,मुख्य अतिथि श्री वंशीलाल किचलू ,विशेष अतिथि श्री जोगेंद्र भान और मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ विश्वास कुमार थे।  "19 और 20 जनवरी 1990 की कश्मीर घाटी की सर्द रातों में मस्जिदों से एलान किये गए कि सभी कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़ कर चले जायें, अपनी पत्नी ..

कश्मीरी हिंदुओं के लिए काला दिन है 19 जनवरी

  19 जनवरी उन सभी कश्मीरी हिंदुओँ की सामूहिक स्मृति का हिस्सा है जिनकी जड़ें घाटी में हैं और जिन्हें जिहादियों की बंदूक के डर से अपने घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था  दुनिया भर के कश्मीरी हिंदू 19 जनवरी को 'महाविनाश दिवस' के रूप में मनाते हैं। यही वह दिन था जब एक आतंकी देश पाकिस्तान से मिले हथियारों और उकसावे के परिणामस्वरूप जिहादियों ने अपने स्थानीय संगठनों की मदद से घाटी के मुठ्ठी भर हिंदुओं का उनकी जन्मभूमि से सफाया कर देने की नीयत से झपट्टा मारा था।  पांच ..

J&K: वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी परिवारों के साथ भद्दा मजाक, मुआवज़े के लिए मांगे 1951-57 लोकसभा चुनाव वोटर लिस्ट, राज्य में पहला लोकसभा चुनाव हुआ 67 में

  पिछले 70 सालों से जम्मू कश्मीर की सरकारें वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी परिवारों के साथ सिर्फ भद्दा मजाक करती आई हैं। ये परिवार आज भी बेसिक सुविधाओं से महरूम हैं। राज्य प्रशासन की बेरुखी का एक और उदाहरण फिर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आवंटित वित्तीय सहायता धनराशि को बांटने के लिए राज्य के रेवन्यू डिपॉर्टमेंट ने रिफ्यूजी परिवारों से कुछ शिनाख्ती कागज़ात जमा कराने को कहा है, इस लिस्ट में एक रिकॉर्ड है 1951 और 1957 लोक सभा चुनाव की वोटर लिस्ट से संबंधी रिकॉर्ड डॉक्युमेंट। यानी जिसको ..

Dear Hindufobic Liberals, कोलंबिया यूनिवर्सिटी कह रही है, भारत में 2500 साल पहले होती थी प्लास्टिक सर्जरी

  सबको बताया जाता है प्लास्टिक सर्जरी एक मॉडर्न मेडिकल साइंस का कोई चमत्कार है। लेकिन कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि प्लास्टिक सर्जरी का इतिहास 2500 साल पुराना है और जिसका नाता है भारत से। कोलंबिया यूनिवर्सिटी, जोकि दुनिया टॉप 15 यूनिवर्सिटी में से एक है, की रिसर्च के मुताबिक प्लास्टिक सर्जरी का मॉडर्न मेडिकल साइंस से कोई लेना देना नहीं है। बल्कि इसकी जड़ें ये 6वीं शताब्दी ईसापूर्व में भारत के प्रसिद्ध चिकित्साशास्त्री सुश्रुत तक पहुंचती है। जिन्हें भारत में (Hindufobic Liberals ..

छत्तीसिंहपुरा नरसंहार: जब कश्मीर में इस्लामी आतंकियों ने किया था सिखों को कत्लेआम

  आजादी के 53 साल बाद साल 2000 की शुरूआत में जब देश जब तरक्की के नये सपनें देख रहा था। कश्मीर में बसे हिंदू और सिख तब भी दशकों से चल रहे आतंक के साये में जीने के मजबूर थे। केंद्र में वाजपेयी की सरकार थी और जम्मू कश्मीर में फारूख अब्दुल्ला की। 21 मार्च को अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत पहुंचने वाले थे। दुनिया सबकी निगाहें साउथ एशिया में शांति और क्लिंटन दौरे पर थी। ऐसे में कश्मीर के आतंकियों ने दुनिया को ये दिखाने का मौका चुना कि कश्मीर अभी भी आतंकियों की गिरफ्त में हैं और निशाना ..

''हिन्दुओं कश्मीर खाली करो", कश्मीर: जन्नत से जहन्नुम तक की दर्दनाक कहानी

कश्मीरी हिन्दुओं के ऊपर अत्याचारों की पराकष्ठा हो चुकी थी, परोक्ष रूप से असफल रहने के बाद कश्मीरी हिन्दुओं को घर से भगाने की जिम्मेदारी हिज्बुल मुजाहिद्दीन ने ली. 4 जनवरी सन 1990 ई. को स्थानीय उर्दू अखबार में हिज्बुल मुजाहिद्दीन ने बड़े बड़े अक्षरों में प्रेस विज्ञप्ति दी कि -..

12 दिसम्बर महान सेनानी जनरल जोरावर सिंह का बलिदान दिवस

12 दिसम्बर महान सेनानी जनरल जोरावर सिंह का बलिदान दिवस..

25 नवम्बर 1987 LTTE उग्रवादियों के काल थे मेजर रामास्वामी परमेस्वरन

  मेजर रामास्वामी परमेस्वरन को १९८७ में मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया lमेजर रामास्वामी का जन्म १३ सितम्बर १९४६ को मुंबई में हुआ था l १९७२ को मेजर रामास्वामी ने महार रेजिमेंट में शामिल हो गए l उनकी विशेषता थी की उन्होंने सेना के कई सुरक्षा अभियानों में भाग लिया था और हमेशा वे आगे रहकर सबका नेतृत्व करते थे l  १९८७ में भारत- श्री लंका समझौते के तहत भारतीय शांति सेना को श्री लंका शांति स्थापना के लिए और कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए भेजा गया l इस समझौते के अनुसार लिट्टे ..

1971 के युद्ध में लांस नायक राम उग्रम पांडे ने अकेले तीन बंकरों को ध्वस्त कर दिया।

 1971 में पाकिस्तान से युद्ध में केवल 21 वर्ष की आयु के लांस नायक राम उग्रम पांडे के बलिदान और वीरता को सम्मानित करते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान किया गया । राम उग्रम पांडे का जन्म 1 जुलाई 1942 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िले के ऐमा बेशी गाँव में हुआ था । 1962 में वे सेना में भर्ती हो गए ।1971 में बांग्लादेश युद्ध के समय 8 गार्ड के सेक्शन कमांडर बनाकर नायक पांडे को ईस्ट पाकिस्तान के मुरापारा के पहाड़ी इलाके में भेजा गया था । यहाँ पाकिस्तानी सेना ने कई बंकर बनाये थे, साथ ही ..

नायक चाँद सिंह ने 22 नवम्बर 1947 को जम्मू कश्मीर के उरी की पहाड़ी पर 600 पाकिस्तानी सैनिकों को भागने पर मजबूर कर दिया।

  चाँद सिंह का जन्म 1922 में पंजाब के रामपुराफूल के जैद गाँव में हुआ था l 1939 में उनकी भर्ती सेना में हुई l 1947 में विभाजन के समय, पाकिस्तान की इच्छा थी की जम्मू कश्मीर के विलय भारत के बजाय पाकिस्तान में हो, परन्तु जब पाकिस्तान को लगा की महाराजा हरी सिंह अपनी रियासत का विलय पाकिस्तान में नहीं करेंगे तो 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर धावा बोल दिया l 26 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर का अधिमिलन भारत के साथ हो गया और भारतीय सेना पाकिस्तान से आये कबाइलियों और पाकिस्तानी ..

21 नवम्बर 1971 - भारत-पाकिस्तान युद्ध: अतग्राम विजय और गोरखा शोर्य की कहानी

 1971 में पूर्वी पाकिस्तान या ईस्ट पाकिस्तान से युद्ध के समय भारतीय सेना ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास एक घमासान युद्ध लड़ा जिसे अतग्राम युद्ध के नाम से जाना जाता है l  1971 में शुरुवाती जंग में से एक ये लड़ाई भारत की 4/5 गोरखा राइफल्स और पाकिस्तान की 31 पंजाब रेजिमेंट के बीच भारत पाकिस्तान सीमा के पास अतग्राम में हुई l ये गाँव सीलहेत कस्बे से करीब 35 कि. मी. पर स्थित है , पास में सुरमा नदी थी जो भारत के आसाम के कचर जिले और पूर्वी पाकिस्तान के बीच एक प्राकृतिक विभाजन करती हैl  पूर..

18 नवम्बर 1962 को सेकेण्ड लेफ्टिनेंट श्यामल देव गोस्वामी लड़ते लड़ते वे बेहोश होकर गिर पड़े.

  1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में सेकेण्ड लेफ्टिनेंट श्यामल देव गोस्वामी को महlवीर चक्र से सम्मानित किया गया l श्यामल देव गोस्वामी के जन्म ६ नवम्बर 1938 को मेरठ, उत्तरप्रदेश में हुआ l उनकी भर्ती तोपखाने की रेजिमेंट में हुई l   1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया. लड़ाई, लद्दाख की चोटियों में हुई तो अरुणाचल प्रदेश में भी हुई l सेकेण्ड लेफ्टिनेंट श्यामल दस की तैनाती गुरुंग हिल की ऑब्जरवेशन पोस्ट/ निरिक्षण चौकी पर थी जहाँ वे निरिक्षण अफसर थे l गुरुंग हिल से उन्हें चुशुल ..

1962 में चीन के साथ युद्ध में मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता पदक परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

   १८ नवम्बर १९६२- मेजर शैतान सिंह १ दिसम्बर १९२४ को जोधपुर, राजस्थान में जन्मे मेजर शैतान सिंह भाटी के पिता हेम सिंह भाटी भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे l १९४९ में मेजर शैतान सिंह कुमाऊँ रेजिमेंट में आये l १९६२ में चीन के साथ युद्ध में उनकी रेजिमेंट, चीन की सीमा से महज १५ कि. मी. दूर, लद्दाख के चुशुल सेक्टर में, १७,००० फ़ीट की ऊँचाई पर, रोज़ांगला में तैनात की गयी. यहाँ एक हवाई पट्टी थी, जिसकी सुरक्षा के ज़िम्मा13 कुमाऊँ रेजिमेंट की इस टुकड़ी को दिया गया था. रोज़ांगला ..

राइफलमैन जसवंत सिंह रावत को 21 वर्ष की आयु में मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

   17 नवंबर 1962- राइफलमैन जसवंत सिंह रावत, 4 गढ़वाल राइफल्स   1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया थाl अरुणाचल प्रदेश के ऊँचे पहाड़ों पर घमासान युद्ध चल रहा था l भारतीय सिपाही जी जान लगा कर लड़ रहे थी, पर चीन हर दृष्टि से भारत पर हावी था l उनके पास सैनिक संख्या बहुत बड़ी थी, बहुत बड़ी मात्रा में हथियार और वो भी आधुनिक हथियार थे, जिनकी मारक क्षमता अधिक थी l हालाँकि भारत के पास सैन्य बल और हथियार दोनों की ही कमी थी, पर एक बात की कमी नहीं थी और वो था मनोबल l चीन ..

14 नवम्बर 1948 को भारतीय सैनिक लाल सिंह ने अकेले 6 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया

 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया और २६ अक्टूबर १९४७ को इस रियासत के शासक महाराजा हरी सिंह ने अपने अधिकारों के तहत जम्मू कश्मीर का अधिमिलन भारत में कर दिया l अधिमिलन के बाद जम्मू कश्मीर की सुरक्षा भारतीय सेना की ज़िम्मेदारी थी क्योंकि अब इस राज्य का अधिमिलन भारत में हो गया था l पाकिस्तान किसी भी नियम कानून के तहत अब जम्मू कश्मीर नहीं हथिया सकता था, तो उसने, अपनी सेना का प्रयोग कर राज्य पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा करने की कोशिश शुरू कर दी l भारतीय सेना,नवम्बर के पहले सप्ताह ..

14 नवम्बर 1947- लेफ्टिनेंट कर्नल अनंत सिंह पठानिया

  जम्मू कश्मीर के ज़ोजिला ऑपरेशन में १/५ गोरखा राइफल्स की पहली टुकड़ी ने जीत हासिल की l गोरखा राइफल्स की इस टुकड़ी की उपलब्धियों का श्रेय लेफ्टिनेंट कर्नल ए. एस. पठानिया को जाता है l उनके अदम्य साहस और सक्षम नेतृत्व ने इस टुकड़ी को जीत दिलाई l 1947 में भारत आज़ाद हुआ और साथ ही देश का विभाजन भी हुआ l एक तरफ साम्रदायिक दंगे हो रहे थे और दूसरी ओर पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया l ऐसे समय में लेफ्टिनेंट कर्नल अनंत सिंह पठानिया १/५ गोरखा राइफल्स में पहले भारतीय कमांडिंग ऑफिसर ..

राजौरी नरसंहार: 1947 की वो काली रात

   दीवाली का मतलब है खुशियां, चारों तरफ रौनक । लेकिन क्या आप जानते है जम्मू कश्मीर के राजौरी की दीवाली से जुडी ऐसी यादें है जिन्हे याद कर राजौरी के लोग आज भी सिहर उठते है. 1947 में पाकिस्तानी सेना ने जम्मू कष्मीर पर हमला किया. नवम्बर के महीने तक उन्होंने पूँछ जिले के ज्यादातर हिस्सों पर कब्ज़ा कर लिया था। इस हमले की वजह से बहुत सारे लोग राजौरी शहर में इकठ्ठे हो गए. पाकिस्तानी सेना ने दीवाली के दिन राजौरी शहर पर हमला बोला। सभी लोग राजौरी में तहसील भवन में जमा हो गए थे. जब पाकिस्तानी ..

पंडित टिकालाल टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू

 कश्मीर घाटी से पंडितों का पलायन कोई आकस्मिक दुर्घटना नहीं थी. इसकी पटकथा सन 1965 में लिख दी गयी थी जब भारत-पाक युद्ध चल रहा था. यह स्मरण रहे कि सन ’65 का युद्ध जम्मू कश्मीर राज्य को पूरी तरह पाकिस्तान में मिलाने के उद्देश्य से लड़ा गया था किंतु पाकिस्तान इस उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया था क्योंकि तब तक कश्मीर में पाकिस्तान परस्ती और अलगाववाद का बीज नहीं बोया जा सका था. इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अगस्त 1965 में अमानुल्लाह खान और मकबूल बट ने पाक अधिकृत कश्मीर में ‘नेशनल लिबरेशन ..

3 नवंबर 1947, भारत-पाकिस्तान युद्ध- बडगाम के हीरो परमवीर मेजर सोमनाथ शर्मा की कहानी

   मेजर सोमनाथ शर्मा कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी कमांडर थे। मेजर सोमनाथ शर्मा अपने साथियों के साथ कश्मीर घाटी के बड़गाम में तैनात थे। पाकिस्तानी हमलावर जम्मू कश्मीर के बारामुला होते हुए बड़गाम तक आ पहुंचे थे। मेजर सोमनाथ के सामने थी 700 दुश्मनों की सेना, जो मोर्टार, रायफल औऱ लाइट मशीनगनों से हमला शुरू कर दिया। दुशमनों की संख्या बहुत ज्यादा थी औऱ उन्होंने मेजर सोमनाथ की कंपनी को 3 तरफ से घेर लिया था।  सिपाही अपना आत्मविश्वास न खो दें इसलिए वह स्वयं ..

सरदार पटेल ने कैसे जम्मू कश्मीर का अधिमिलन भारत में कराया, जानिए ये दिलचस्प कहानी

    आजादी के समय देश के एकीकरण में सरदार वल्लभ भाई पटेल का सबसे बड़ा योगदान था। भारत के ताज़ जम्मू कश्मीर के अधिमिलन में भी सरदार पटेल की कूटनीतिक भूमिका का महत्वपूर्ण योगदान था। जम्मू कश्मीर एक ऐसा राज्य था जिसकी सीमा पाकिस्तान और भारत दोनों से मिलती थी. महाराजा हरी सिंह दोनों में से किसी भी डोमिनियन में जा सकते थे। ऐसी परिस्थितियों हरी सिंह के इस वैधानिक अधिकार का सम्मान करना सरदार वल्लभ भाई पटेल की वैधानिक और राजनैतिक दक्षता थी. वो जानते थे ऐसे समय में हम किसी तरह का दबाव ..

जानिए राजौरी, जम्मू कश्मीर के वीर बंदा बैरागी बहादुर की कहानी

  18वीं सदी की शुरूआत में वीर बंदा बैरागी एक ऐसा नाम था, जिसको सुनकर दिल्ली की सल्तनत पर बैठे मुगल भी थर्राते थे। खालसा के पहले जत्थेदार बन्दा सिंह बहादुर बैरागी एक सिख सेनानायक थे। उन्हें माधो दास के नाम से भी जाना जाता है। वे पहले ऐसे सिख सेनापति हुए, जिन्होंने मुग़लों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा; छोटे साहबज़ादों की शहादत का बदला लिया और गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा संकल्पित प्रभुसत्तासम्पन्न लोक राज्य की राजधानी लोहगढ़ में ख़ालसा राज की नींव रखी। 1. बाबा बन्दा सिंह बहादुर का जन्म कश्मीर ..

महाराजा हरि सिंह: जम्मू कश्मीर अधिमिलन के महानायक

   जम्मू कश्मीर का भारत के साथ अधिमिलन 26 अक्टूबर 1947 को हुआ औऱ इसका सबसे बड़ा क्रेडिट सिर्फ एक शख्स को जाता है, जम्मू कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह। अधिमिलन के नियमों के अनुसार प्रिंससी स्टेट्स के सिर्फ राजा य़ा नवाब को ये अधिकार था, कि वो अपने राज्य का भविष्य तय करे कि उसे किस देश का हिस्सा बनना है, भारत का या पाकिस्तान का। अंग्रेजी कूटनीति औऱ जिन्ना की तमाम कोशिशों, छल-प्रपंचों के बावजूद महाराज हरि सिंह ने भारत को चुना। उनके एक हस्ताक्षर के चलते ही यूनाइटेड नेशन्स ने भी माना ..

1947 में पाकिस्तानी सेना द्वारा जम्मू कश्मीर में किये गए नरसंहार

 1947 में जम्मू कश्मीर के भारत अधिमिलन ठीक पहले पाकिस्तान ने 22 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के साथ कबाइली सेना ने जम्मू कश्मीर में वो नरसंहार किया। जिसकी बानगी मानव इतिहास में कम ही मिलती है। पाकिस्तानी हमले क..

जम्मू कश्मीर अधिमिलन और सरदार पटेल का योगदान

  जम्मू कश्मीर को लेकर 1947 के बाद हमारे देश का चिन्तन केवल कश्मीर घाटी तक रहा है जो कि राज्य, का सबसे छोटा हिस्सा है। जम्मू कश्मीर का क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग किलोमीटर है, कश्मीर घाटी का क्षेत्रफल केवल 16,000 वर्ग किलोमीटर है। देश के मीडिय..

पंडित प्रेमनाथ डोगरा: आज़ाद भारत के पहले राष्ट्रवादी आंदोलन के प्रणेता

  प्रजा परिषद् आन्दोलन स्वतंत्र भारत के इतिहास का प्रथम राष्ट्रवादी आन्दोलन था।जम्मू कश्मीर में भारत के संविधान को पूर्णतया लागू कराने और भारत की एकता और अखण्डता के लिए चलाये गये इस आन्दोलन के प्रणेता पं. प्रेमनाथ डोगरा थे। प्रजा परिषद् की स्थाप..

मीरपुर नरसंहार: स्मरण, सबक औऱ संकल्प

  कभी कभी वर्तमान के यथार्थ पर खड़े होकर इतिहास के स्मरण चिन्हों को देखना चाहिए ,इससे भविष्य की दिशा और दशा का ज्ञान भान होकर कुछ सबक मिलते हैं जिनसे व्यक्ति या समाज , भविष्य के लिए देश हित मे कुछ करने या न करने के लिए संकल्पित हो ..

जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तानी हमले का सिलसिलेवार वर्णन ( 3 september 22 october 1947).

  15 अगस्त 1947, को ब्रिटिश राज समाप्त हुआ, हिंदुस्तान और पाकिस्तान अधिराज्यों की स्थापना हुई, साथ ही उपमहाद्वीप में सभी रियासतों पर से ब्रिटिश प्रभुसत्ता भी समाप्त हो गयी. शीघ्र ही भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया की राज्यों के लिए स्वतंत्रता का अर्थ था भारत या पाकिस्तान में विलय. जम्मू कश्मीर के महाराजा ने विलय सम्बन्धित अपना निर्णय कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया क्योंकि राज्य में उस समय कुछ ऐसी परिस्तिथयाँ बन गयी थीं. साथ ही उन्होंने कुछ व्यावहारिक शर्तों सहित दोनों देशों के ..

जम्मू कश्मीर रियासत के पहले महाराज गुलाब सिंह के 226वें जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि

  जम्मू के श्री रघुनाथ मंदिर में जम्मू कश्मीर के पहले डोगरा महाराज गुलाब सिंह की 226वां जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर महाराजा गुलाब सिंह के वंशज औऱ श्री रघुनाथ मंदिर के ट्रस्टी डॉ कर्ण सिंह ने हिस्सा लिया। जहां उन्होनें महाराज गुलाब सिंह को पुष्पांजलि भेंट की। मंदिर में हवन का आयोजन किया गया था। जिसमें भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर डॉ कर्ण सिंह ने कहा कि महाराजा गुलाब सिंह पहले डोगरा महाराजा थे। जो घुड़सवारी, तलवारबाज़ी और बंदूक से निशानेबाजी में पारंगत थे। ..

जम्मू-कश्मीर: आतंक के गढ़ में नामांकन को उमड़े प्रत्याशी

आतंकी धमकियों को दिखाया अंगूठा, 36 ने भरे पर्चे..

शहीद लेफिटनेंट उमर फ़ैयाज़ के गांव में तयार हो रहें हैं अनेकों फ़ैयाज़

lieutenant Umar Fyaz..

छुट्टी से लौटा जवान 6 दिन बाद ही घर पहुंचा तिरंगे में लिपट कर

आज की कहानी है जम्मू के कठुआ जिले के मुकंदपूर गांव के रहने वाले आर्मी के जवान शुभम सिंह की। शुभम आर्मी के 15 जेक के जवान थे जो जम्मू कश्मीर के राजौरी में तैनात थे। 4 फरवरी 2018 की शाम अचानक से राजौरी सेक्टर में एलओसी के पास पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग शुरू कर दी, अचानक से हुए इस हमले का शुभम ने भी मुहतोड़ जवाब दिया।..

शहीद के 5 साल के बेटे ने दिखा दी आतंकियों को उनकी औकात

जम्मू कश्मीर की वादियां सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं जानी जाती बल्कि इन वादियों में ऐसे सूरमा भी पैदा होते हैं जिन्हें पूरा देश नमन करता है। इन्हीं वीरों की भूमि में एक एैसा युवा पैदा हुआ जिसने देश की हिफाजत के लिए अपनी जान तक कुरबान कर दी। हम बात कर रहें हैं सीआरपीएफ के जवान नासीर एहमद राठेर की जी हां ये वही जवान हैं जिसे 29 जुलाई को आतंकियो ने गोली मार दी। नासीर एहमद जम्मू कश्मीर के नाइरा गांव के रहने वाले थें जो सीआरपीएफ के 182 बटालियन के जवान थे उनकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के पुलवामा में ..

कश्मीर में हुई मॉब लिंचिंग पर सवाल क्यों नहीं \

  कहते हैं कि देश के लिए मर मिटना हर सिपाही का सपना होता है पर अगर किसी सैनिक को कुछ देश के गद्दार लोगों द्वारा पीट पीट कर मार डाला जाए तो इसे देखकर हर भारतीय का खून खौल उठता है। जी हां हम बात कर रहे हैं जम्मू कश्मीर पुलिस के डी. एस. पी. मुहम्मद अयूब पंडित की।ये वही अयूब पंडित हैं जिन्हें 22 जून 2017 को श्रीनगर के जामिया मस्जिद के बाहर आतंकी सोच के लोगों द्वारा पीट पीट कर मार डला गया। मुहम्मद अयूब पंडित घाटी मैं मौजूद अलगाववादी और पाकिस्तान में मौजूद उनके आकाओं की आंखों में खटकते थे उनकी ..

एक कॉन्स्टेबल बना घाटी के आतंकियों की मौत

कहते हैं कि वीरों की शहादत उनका अंत नहीं बल्कि शुरूवात होती है। वो भले ही इस दुनिया से चले जाएं मगर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा जिन्दा रहती है। ऐसी ही कहानी है एक जाबांज सिपाही की जिसकी जिंदगी तो बहुल छोटी थी पर उनके कारनामें बहुत बडे़ हैं। आज हम नमन करेगें जम्मू कश्मीर पुलिस के कॉन्स्टेबल मोहम्मद सलीम शाह की शहादत को। मोहम्मद सलीम जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले थे। वो 2016 में स्पेशल पुलिस फोर्स में भर्ती हुए पर उनकी बहादुरी और मेहनत की बदौलत उन्हे प्रमोट करके जम्मू कश्मीर पुलिस में ..

क्यों हत्या की आतंकियों ने कॉन्स्टेबल जावेद अहमद डार की

  जम्मू कश्मीर पुलिस के कॉन्स्टेबल जावेद अहमद डार की कहानी जानकर आपका सीना गर्व से चैड़ा हो जाएगा। जावेद भारत माँ का वो बेटा था जो घाटी में बैठे देश के दुश्मनों का काल था। अपने देश के लिए जावेद की देश भक्ति ही उसकी शहादत का कारण बनी।जावेद शोपिया जिले के रहने वाले थे। वो अपनी शिक्षा पूरी करते ही पुलिस में बतौर कॉन्स्टेबल भर्ती हुए। जावेद एस एस पी शैलेंद्र मिश्रा के पर्सनल सिक्युरिटी गार्ड थे और उन्होंने एस एस पी शैलेंद्र मिश्रा के साथ मिलकर कई सफल आतंकी ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इसलिए जावेद ..

अपने पिता से विरासत में मिली थी देश पर मर मिटने की सौगात जेकी शर्मा

   जम्मू कश्मीर में भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा को एलओसी के नाम से जानते हैं। इसकी कुल लंबाई 7 सौ 16 किलोमीटर है जिस पर पाकिस्तान अक्सर सीज फायर का उल्लंघन करता रहता है। पाकिस्तान के तरफ से 2016 में 228 और 2017 में 860 बार सीज फायर का उल्लंघन किया जा चुका है।  इसी कड़ी में 11 अप्रैल 2018 को जम्मू कश्मीर के सुंदरबनी सैक्टर में एलओसी पर शाम के 5-30 बजे पाकिस्तान ने भारतीय पोस्ट पर अचानक से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले का मुहतोड़ जवाब देते हुए भारतीय सेना के राइफल मैन जेकी शर्मा ..

दुश्मनों से जीता पर कुदरत से हारा: हवलदार सेवांग नोरबू

   हमारे देश के वीरों का पराक्रम केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं दिखता बल्कि शांति काल में भी इनका योगदान रहता है और आज हम एक ऐसे ही शहीद को याद करेंगे जिन्होंने अपनी जान देश पर कुरबान कर दी। जम्मू कश्मीर के लेह जिले में पैदा हुए हवलदार सेवांग नोरबू अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद भारतीय सेना के लद्दाख स्काउट में भर्ती हो गए। सेवांग भारतीय सेना के एक बहुत ही अच्छे पर्वतारोही थे। वो सेना द्वारा किये गए बहुत से कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा रहे। 2016 में सेवांग नोरबो की बटालियन को सियाचिन ..

जम्मूू-कश्मीर के शहीदों की दास्तान: अब्दुल राशिद पीर

जम्मू कश्मीर पुलिस के एएसआई अब्दुल राशिद पीर की कहानी..